प्रयागराज के तीन दरोगाओं का निलंबन सिर्फ एक घटना नहीं, एक ऐसा सच है जो यूपी पुलिस की पूरी व्यवस्था के भीतर झांकने पर मजबूर करता है। रीवा के विपिन पाठक अपनी शादी की खरीदारी के लिए अपने दोस्त के साथ प्रयागराज आए थे, उनकी कार में ख़रीदारी के लिए 6.55 लाख रुपये थे। नैनी में पुलिस ने जांच के बहाने रकम देखी, मन बहका, और विपिन पाठक को सीधे स्मैक बेचने के आरोप में अपराधी बना दिया गया । मुकदमे में 6.55 लाख नहीं, सिर्फ 87,500 रुपये की बरामदगी दिखाई गई और बाकी जीम लिए गए । मामले में जंग लगे तमंचे-पिस्टल "बरामद" बताए गए, संयोगवश जिन्हें अदालत ने चलने लायक नहीं पाया तो रिमांड की अर्जी खारिज की और पुलिस की भूमिका पर सवाल उठाया, और दोनों युवक जेल नहीं भेजे गए। कोर्ट के आदेश पर चली विभागीय जांच के बीच रकम वापस करने की बातचीत का ऑडियो सीनियर अफसरों तक पहुंचा—और तीनों दरोगा विक्की गुप्ता, रामानंद विश्वकर्मा और नीलेश कुमार सस्पेंड कर दिए गए।
तीन दरोगाओं का निलंबन सिर्फ एक सफाई है; सवाल उस व्यवस्था से है जो उन्हें ऐसा करने की हिम्मत देती है।
