Advocate Beaten By Police When He Started Videography Of Denial Of FIR


 POLICE ने वकील की २ घंटे पिटाई की , फिर नही लिखने पर वकील वीडियो बनाने लगा। पुलिस थाना गुंडा घर बन गया। कोई ललिता कुमारी गाइडलाइन मानता ही नहीं।


छतरपुर MP कोतवाली थाना में सुप्रीम कोर्ट के युवा वकील के साथ बेरहमी से मारपीट का सनसनीखेज मामला सामने आया है। वकील के साथ पुलिस ने पट्टे से मारपीट तब की जब वो गुंड़ो के हमले में लहुुलुहान होकर मदद मांगने थाना पहुंचा था। पुलिस ने थाना क्षेत्र सिविल लाइन होने का हवाला देकर एफआइआर से इंकार किया तो वकील ने उन्हें कानून बताया कि जीरो पर केस दर्ज कर लीजिए। पुलिस को वकील का कानून बताना इतना नागंवार गुजरा कि तीन पुलिस कर्मचारियों ने वकील को पट्टे से जमकर पीटा। वहीं पुलिस कर्मचारियों की गुंड़ागर्दी के बचाव में पुलिस के अधिकारी भी वकील की सुनवाई नहीं कर रहे हैं।

ये है मामला
शहर के सागर रोड पर फोर सीजन होटल के पास की कॉलोनी निवासी 28 वर्षीय आकाश शुक्ला सुप्रीम कोर्ट नई दिल्ली में वकील हैं। 17 अगस्त की रात 8.30 बजे अपने घर के पास मैन रोड पर खड़े होकर फोन से बात कर रहे थे। इसी दौरान दो युवक आए और वहां खड़े होने को लेकर विवाद किए और मारपीट करने लगे। उनमें से एक ने सिर में पत्थर मारा। लहूलुहान आकाश कोतवाली थाना पहुंचे और एफआइआर दर्ज करने को कहा। आकाश का आरोप है कि वहां मौजूद एसआई गोविन्द राजपूत ने ये कहकर एफआइआर करने से मना कर दिया कि घटना क्षेत्र सिविल लाइन थाना का है। इस पर वकील वोले आप जीरो पर एफआइआर कर लें, मुझे बहुत चोट लगी है, खून बह रहा है। पुलिस अधिकारी ने तब भी एफआइआर से मना किया तो वकील मोबाइल से वीडियो बनाने लगे। बस इतने पर गोविंद सिंह राजपूत व तीन पुलिस कर्मचारी थाना में लगे सीसीटीवी कैमरे की नजर से आकाश को उठाकर एक कमरे में ले गए और पट्टे व लात घूंसो से जमकर पीटा। पीटने के बाद पुलिस आकाश को बाहर लाई और जाने को कहा, जिसपर आकाश ने अपना मोबाइल मांगा तो एसआई मां बहन की गालियां देने लगे, आकाश बोले गालियां मत दीजिए, तो तीन पुलिस कर्मचारियों ने उन्हें फिर से पीटा। इस बार मारपीट सीसीटीवी कैमरे के सामने की गई।

दो घंटे बाद टीआई ने पहुंचाया सिविल लाइन
आकाश ने बताया कि उनके साथ रात 9 से 11 बजे तक पुलिस द्वारा मारपीट का घटनाक्रम कोतवाली में चलता रहा। घटना के तुरंत बाद उनके पिता ओमप्रकाश शुक्ला भी कोतवाली पहुंच गए। उन्होंने पुलिस अधिकारियों को मारने पीटने से रोकने के लिए उनके हाथ पैर जोड़े, इसी बीच कोतवाली टीआई अरविंद दांगी भी कोतवाली पहुंच गए। उन्होने आकाश की स्थिति देखी और अपनी गाड़ी से आकाश को सिविल लाइन थाना पहुंचाया, जहां उनके साथ सागर रोड़ पर हुई मारपीट की रिपोर्ट लिखी गई।

सिविल लाइन पुलिस ने लिखी मनमानी रिपोर्ट
आकाश शुक्ला का आरोप है कि सिविल लाइन पुलिस ने भी उनके बताए अनुसार रिपोर्ट नहीं लिखी। मारपीट की घटना के बाद से उनकी सोने की अंगूठी व चेन गायब है, लेकिन पुलिस ने एफआइआर में नहीं लिखी। आकाश ने बताया कि मारपीट करने वाले में एक ने अपना नाम विक्रम सिंह परमार बताया और दूसरा युवक बब्बू राजा का बेटा है। लेकिन पुलिस ने मारपीट के मामले में केवल विक्रम सिंह परमार पर एफआइआर की,दूसरे आरोपी को अज्ञात बताया।

बार संघ ने एसपी को दिया ज्ञापन
वकील आकाश शुक्ला के साथ हुई घटना के बाद बार संघ अध्यक्ष राकेश दीक्षित व अन्य साथी पुलिस अधीक्षक सचिन शर्मा से मिले और वकील के साथ कोतवाली थाना में हुई मारपीट के मामले में कार्रवाई की मांग की। पुलिस अधीक्षक ने कोतवाली के सीसीटीवी फुटेज की जांच कर आगे की कार्रवाई की बात कही है। बार संघ अध्यक्ष का कहना है कि एसपी ने उन्हें मारपीट के आरोपी पुलिस कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई करने का आश्वासन दिया है।

जांच करा रहे
शिकायत मिली है, मैने इस मामले की जांच के आदेश दिए हैं। जांच में जो तथ्य सामने आएंगे, उसके मुताबिक कार्रवाई की जाएगी। रही बात पुलिस पर लगने वाले गंभीर आरोपी की, तो सभी मामलों में जांच कराकर कार्रवाई की जाएगी।

विवेक राज सिंह, डीआइजी छतरपुर

कोर्ट से मिलेगा न्याय
मेरे साथ कोतवाली पुलिस ने बेरहमी से मारपीट की है। मैं रिपोर्ट लिखाने गया था, लेकिन पुलिस ने रिपोर्ट लिखने के बजाए मुझसे मारपीट की। वरिष्ठ अधिकारियों से शिकायत की है। अब मैं कोर्ट में इस्तगासा करूंगा, मुझे कोर्ट से ही न्याय की उम्मीद है।
आकाश शुक्ला, पीडि़त वकील

4 Comments

  1. Rediculouse. A solid proof of Police atrocities everywhere. Let the finding of the Hon. Court may provide opt judgment to rootput the atrocity. Dr.K.V.Rao

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  2. Ask cctv footage . Already sc ordered to keep in every ps

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  3. As per Sc Guideline in 2020 all rooms & lockup no area of police pemises without cctv,keep recording for more then 16mth,if advocate is treated in this manner just imagin hove a civilin citizen having less knowlage will be undergoing

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  4. Advocate is an officer of court, if no immunity in this kind of crime then APA is required religiously.

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