6500 Labourers Died For Qatar FIFA CUP Preparation!


 



फ़ुटबॉल वर्ल्ड कप के लिए क़तर ने सात स्टेडियम, एक नया एयरपोर्ट, मेट्रो, सड़कें और होटल बनाए हैं. फ़ाइनल मैचों के लिए लुसाल स्टेडियम को पिछले पांच साल में बनाया गया.

क़तर की सरकार के मुताबिक़ स्टेडियमों को बनाने के लिए 30,000 विदेशी कामगारों को काम पर रखा गया था. इनमें से अधिकांश बांग्लादेश, भारत, नेपाल और फ़िलीपींस से हैं.

विश्वकप की तैयारी के दौरान मरने वाले कामगारों की संख्या को लेकर काफ़ी विवाद रहा है.

ब्रिटिश अख़बार गॉर्डियन की एक रिपोर्ट के अनुसार, "क़तर में स्थित तमाम देशों के दूतावासों से मिले आंकड़े बताते हैं कि साल 2010 में जबसे वर्ल्ड कप की मेज़बानी क़तर को सौंपी गई, तबसे भारत, पाकिस्तान, नेपाल, बांग्लादेश और श्रीलंका के 6,500 कामगारों की मौत हुई."

लेकिन क़तर ने इस संख्या को ख़ारिज करते हुए इसे 'भ्रामक और ग़लत' बताया.

क़तर सरकार का कहना है कि मरने वाले कामगारों में सभी वर्ल्ड कप के प्रोजेक्टों से जुड़े नहीं थे और उनमें अधिकांश की मौतें उम्र संबंधित बीमारियों या प्राकृतिक कारणों से हुई थीं.

क़तर का कहना है कि उसके रिकॉर्ड के अनुसार 2014 से 2020 के बीच 37 कामगारों की मौत हुई जो स्टेडियम निर्माण में लगे हुए थे और उनमें भी तीन ही मौतें काम से संबंधित हैं.

लेकिन इंटरनेशनल लेबर आर्गेनाइजेशन (आईएलओ) का कहना है कि क़तर सरकार द्वारा दी गई संख्या असल सच्चाई को बयान नहीं करती. क़तर में दिल का दौरा या सांस न ले पाने से होने वाली मौतें को काम संबंधित दुर्घटना में नहीं जोड़ा जाता जो कि हीट स्ट्रोक और अत्यधिक तापमान में भारी सामान ढोने से भी हो सकते हैं.

आईएलओ के अनुसार अकेले 2021 में 50 कामगारों की मौत हुई और 500 गंभीर रूप से घायल हुए, जबकि 37,600 कामगार मामूली या ठीक होने लायक घायल हुए.

बीबीसी अरबी सेवा ने भी कुछ ऐसे साक्ष्य जुटाए हैं जिनसे पता चलता है कि क़तर की सरकार विदेशी कामगारों की मौतों को कम करके दिखाती है.

स्टेडियम कामगारों के इलाज़ को लेकर अंतरराष्ट्रीय दबाव के चलते क़तर ने अपने सुधार कार्यक्रमों के तहत एक लेबर कैंप का निर्माण किया है जहां इनमें से अधिकांश कामगारों के रहने की व्यवस्था होगी.

लेकिन दसियों लाख डॉलर से बनाया जा रहा यह लेबर कैंप दोहा से बाहर और वर्ल्ड कप टूर्नामेंट के दौरान टेलीविज़न पर दिखने वाली लक्ज़री जगहों से बहुत दूर है और वहां प्रेस को जाने की बिल्कुल भी इजाज़त नहीं है.


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